बस इतना सा है मेरी ज़िंदगी का मशगला तेरा नाम तेरा ज़िक्र तेरा चर्चा तेरी फिक्र.!! (रिज़वान)
महक जाती थीं गलियां जब जनाब हमारे गुज़रते थे कुछ दिन पहले तक हमारी आंखों से कैसे ख्वाब गुज़रते थे.!! (रिज़वान)